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क्रोध , Krodh se kaise bache

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  क्रोध जनित समस्याओं से निजात क्रोध के समय थोड़ा रूक जाओ  और गलती होने पर थोड़ा झुक जाओ।  बहुत सी समस्याएं अपने आप समाप्त हो जाएगी। प्रतिरक्षा शक्ति निबंध बसंत   ऋतु निबंध इसे भी पढ़ें हिंदू मान्यताओं के अनुसार जन्म दिन कैसे मनाएं                         अरुणिता कांजीलाल की जीवनी समाचार लेखन हमारा  पड़ोसी देश नेपाल, क्लिक करें और देखें   हनुमान पुत्र मकरध्वज की कथा संपर्क करें, contact me

Shubh prabhat

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परिस्थिति का सामना

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Yadee यादें

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डॉ उमेश कुमार सिंह हिन्दी में पी-एच.डी हैं बिमल हिंदी ‌.इन bimal hindi.in और आजकल धनबाद , झारखण्ड में रहकर विभिन्न कक्षाओं के छात्र छात्राओं को मार्गदर्शन करते हैं। You tube channel educational dr Umesh 277, face book, Instagram, khabri app पर भी follow कर मार्गदर्शन ले सकते हैं।

 बिमल हिंदी ‌.इन bimal hindi.in Bimal hindi बिमल हिंदी.इन एक शैक्षिक ब्लॉग है । यहां हिंदी के साथ साथ विभिन्न विषयों की जानकारी उपलब्ध कराई जाती है। डॉ उमेश कुमार सिंह, धनबाद झारखंड , भारत के भूली नगर में रहकर विभिन्न कक्षाओं के छात्र छात्र-छात्राओं का मार्गदर्शन कर रहे हैं। 

Dil दिल की बात

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स्वयं को जानो

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परिवर्तन पर सुविचार

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Parwah परवाह

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Kabhi na kho, कभी न कहो

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मन पर सुविचार man par suvichar

        मन पर सुविचार  मन के हारे हार है, मन के जीते जीत।। कविता क्या है? कविता कैसे बनती है 

सच्चा मंदिर, sachcha mandir

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  मंदिर वह पवित्र स्थान है जहां भगवान का वास होता है। और भगवान वही है जिसमें अच्छाई ही अच्छाई हो इसीलिए किसी विद्वान ने ठीक ही कहा है कि यदि ' भावना ' अच्छी हो तो मन ही मंदिर बन जाता है। लेकिन भावना अच्छी हो तब। ' सर्वे भवन्तु सुखिन सर्वे संतु निरामया' यह भाव सदा सर्वदा मन में बसना चाहिए।  आहार सही और पवित्र रहे तो तन ही मंदिर है। भाई ! ईश्वर ने कितना सुन्दर शरीर हमें प्रदान किया है, देख लीजिए। लेकिन हमारा आहार कभी कभी जंगली जानवरों से भी बदतर हो जाता है। ऐसा जब होता तो फिर विचार भी वैसा ही हो जाता है। जैसा खाओगे अन्न, वैसा होगा मन। विचार, आहार, व्यवहार, भाव सभी अच्छे हो तो जीवन ही मंदिर बन जाता है। जीवन सफल हो जाता है। फिर तो मनुष्य दीनबंधु भगवान बन जाता है। उषा (कविता)  (क्लिक करें और पढ़ें)

जीवन की सच्ची कमाई jeevan ki sachchi kamai

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  मित्रता एक अनमोल रतन है। सच्चा मित्र वही है जिसमें मित्र की भावना हो। जो मित्र के सुख दुख की परवाह करें। जैसे श्री राम और सुग्रीव की मित्रता, जैसे श्री कृष्ण और सुदामा की मित्रता। परवाह करने वाला मित्र मिल जाए तो जीवन सफल हो जाता है। पड़ोसी वही है जो पड़ोसी का दर्द समझे। रिश्तेदार वहीं सच्चा रिश्तेदार हैं जो अपने रिश्तेदारों  को इज्जत करें। और सही में अंत तक प्यार करने वाला परिवार हो तो जीवन सफल हो जाता है। वर्ना जीवन बोझ बन जाता है। कविता क्या है? कविता कैसे बनती है ?

अच्छी बातें सुन्दर जीवन के लिए

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 रहिमन धागा प्रेम का मत तोड़ो चटकाए। टूटे पर फिर ना जुड़े, जुड़े गांठ परि जाय।। अर्थात प्रेम रूपी धागा जल्दी नहीं तोडना चाहिए, क्योंकि  एक बार प्रेम का धागा टूट गया तो जल्दी जुड़ता नहीं है, और यदि जुड़ भी जाय तो उसमें गांठ पड़ जाता है। दरार तो आ ही जाती है। दोस्तों! बढ़िया काम शुरू करने के लिए आज से बढ़िया दिन दूसरा नहीं आएगा, क्योंकि  जब भी बढ़िया काम शुरू कर दी जाए वही शुभ दिन बन जाता है।   काल करो से आज कर, आज करो से अब।    पल में प्रलय होएगी, बहुरि करोगे कब।। यदि अपना संकल्प दृढ़ हो। अपना चरित्र मजबूत हो तो कुसंगति भी कुछ बिगाड़ नहीं सकता। काजल की कोठरी से भी आप बेदाग बाहर निकल आएंगे। जैसे चन्दन के वृक्ष पर बड़े बड़े विषधर कालसर्प रहते हैं, सुगंध के लिए। लेकिन इससे चंदन की शीतलता कम नहीं होती।   जो रहीम उत्तम प्रकृति का करि सकत कुसंग ‌। चंदन विष व्यापत नहीं, लपटे रहत भुजंग।। धन - दौलत आपके पास है। सब कुछ ठीक - ठाक चल रहा है तब तो बहुत  दोस्त  मिल जाएंगे। लेकिन समय यदि अच्छा नहीं चल रहा हो। परिस्थितियां प्रतिकूल हो, तब जो साथ दे, वही सच्चा...