संदेश

सुविचार लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

जीवन का शाश्वत सत्य: जीवात्मा से परमात्मा की यात्रा

क्रोध पर नियंत्रण कैसे करें।   जीवन का शाश्वत सत्य जानें ​ विचार ​एक बार एक शिष्य ने जिज्ञासा व्यक्त की, मानव जीवन की सबसे बड़ी खोज क्या है? यदि इस प्रश्न का सरल उत्तर खोजें, तो वह है- दुखों से पूर्ण मुक्ति और स्थायी शांति की प्राप्ति। इसी अवस्था को 'परमार्थ' कहा जाता है। अर्थात् वह स्थिति, जहां जीवन के सभी क्लेश समाप्त हो जाएं। इस अवस्था तक पहुंचने की जो प्रक्रिया है, वही साधना कहलाती है। ​हम सामान्यतः अपने आपको एक सीमित अस्तित्व के रूप में देखते हैं- एक ऐसा 'मैं' जो इच्छाओं, भावनाओं और परिस्थितियों से घिरा हुआ है। यही 'मैं' जब तक संसार के सुख-दुख में उलझा रहता है, तब तक उसे अपनी असली पहचान का बोध नहीं हो पाता। इस सीमित चेतना को ही जीवात्मा कहा गया है। इसके विपरीत, जब यही चेतना सभी बंधनों से मुक्त हो जाती है, तब उसे परमात्मा का स्वरूप माना जाता है। ​अक्सर लोग सोचते हैं कि आत्मा और परमात्मा दो अलग-अलग सत्ता हैं, जिन्हें साधना के माध्यम से मिलाया जाता है, लेकिन गहराई से देखें, तो यह अंतर वास्तविक नहीं, केवल अनुभव का अंतर है। जीवात्मा और परमात्मा के बीच जो ...