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खुद की मौलिकता (Originality) ही आपकी सबसे बड़ी ताकत है

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  खुद की मौलिकता (Originality) ही आपकी सबसे बड़ी ताकत है: एक प्रेरणादायक ब्लॉग पोस्ट परिचय: क्या आप अपनी पहचान खो रहे हैं? आज की इस भागदौड़ भरी दुनिया में, जहाँ हर कोई एक-दूसरे की नकल करने में लगा हुआ है, अपनी असली पहचान को बचाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। सोशल मीडिया के इस दौर में लोग अक्सर दूसरों की देखा-देखी अपनी जीवनशैली, अपने विचार और यहाँ तक कि अपनी शख्सियत को भी बदलने लगते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा करने से हम असल में क्या खो रहे हैं? हम अपनी मौलिकता (Originality) को खो रहे हैं। इस तस्वीर में दिए गए सुंदर सुविचार — "Never change your originality for the sake of others. Because no one can play your role better than you. So be yourself. You are the best." — का सार यही है कि आपको कभी भी दूसरों को खुश करने के लिए खुद को बदलने की जरूरत नहीं है। आइए इस बात को विस्तार से समझते हैं। 1. समाज की भीड़ और दूसरों की उम्मीदें जब हम समाज में रहते हैं, तो परिवार, दोस्तों और सहकर्मियों की हमसे कई तरह की उम्मीदें होती हैं। समाज अक्सर हमें एक सांचे में ढालना चाहत...

​"जीवन को सरल बनाना: समझदारी से समझौता करना और सही समय पर आगे बढ़ना।"

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  ​ "जीवन को सरल बनाना: समझदारी से समझौता करना और सही समय पर आगे बढ़ना।" इस खूबसूरत और प्रेरणादायक तस्वीर में भगवान श्री कृष्ण का एक चित्र है, जिसके साथ अंग्रेजी में एक बहुत ही गहरा जीवन सत्य लिखा है: "Life becomes much simpler when you learn where to compromise and where to walk away." (जीवन तब बहुत सरल हो जाता है जब आप यह सीख जाते हैं कि कहाँ समझौता करना है और कहाँ पीछे हट जाना है।) इस अनमोल विचार को हिंदी में विस्तार से निम्नलिखित रूप में समझा जा सकता है: जीवन की जटिलता और सरलता का मार्ग मानव जीवन सुख-दुःख, उम्मीदों, रिश्तों और जिम्मेदारियों का एक ताना-बाना है। अक्सर हम अपनी जिंदगी को खुद ही उलझा लेते हैं, क्योंकि हमें यह समझ नहीं आता कि किस परिस्थिति में हमें सहनशीलता दिखानी चाहिए और किस परिस्थिति से खुद को दूर कर लेना चाहिए। श्री कृष्ण के उपदेशों और इस सुविचार का सार हमें यही सिखाता है कि मानसिक शांति और संतुलन बनाए रखने के लिए दो कलाओं में पारंगत होना बहुत जरूरी है— पहला, सही समय पर समझौता (कंप्रोमाइज) करना और दूसरा, सही समय पर दूरी बना लेना (वॉक अवे)। ...

"उम्र का इशारा: मानसिक शांति का रहस्य"

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"सुप्रभात" "जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, छोटे अक्षर दिखाई नहीं देते।" "शायद यह एक इशारा है कि बढ़ती उम्र के साथ छोटी-छोटी बातों को नज़रअंदाज़ करना सीख लेना चाहिए।" जीवन का एक गहरा और प्रेरक संदेश जीवन एक बहती नदी की तरह है, जिसके साथ-साथ समय बीतता जाता है और इंसान की उम्र बढ़ती जाती है। इस तस्वीर के माध्यम से शारीरिक बदलाव (दृष्टि का कम होना) को मानसिक एवं भावनात्मक परिपक्वता (maturity) से बहुत ही खूबसूरती से जोड़ा गया है। 1. शारीरिक बदलाव और जीवन का संकेत जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, हमारी आंखों की रोशनी धीरे-धीरे कम होने लगती है। बारीक या छोटे अक्षर पढ़ने के लिए हमें चश्मे की ज़रूरत महसूस होती है या हम उन्हें स्पष्ट रूप से नहीं देख पाते। यह केवल एक जैविक या शारीरिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि प्रकृति का एक बड़ा संकेत और संदेश भी है। प्रकृति हमें समझाना चाहती है कि जिस तरह हम छोटी और बारीक चीज़ों को शारीरिक रूप से देखना छोड़ देते हैं, उसी तरह हमें जीवन में भी दूसरों की छोटी-छोटी गलतियों, कमियों और बेफिजूल की बातों को देखना या उन पर ध्यान देना बंद कर दे...

जीवन की सीख, सुविचार

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"जीवन है गलतियां होती रहती है, बस इरादे गलत नहीं होने चाहिए।" यह पंक्ति इंसान के स्वभाव, उसकी सीमाओं और उसकी नीयत (इरादे) के बीच के अंतर को बहुत ही सहज और अर्थपूर्ण तरीके से समझाती है। आइए इस विचार के अर्थ, महत्व और हमारे जीवन में इसके प्रभाव पर विस्तार से विचार करें: 1. गलतियां: इंसान होने की स्वाभाविक पहचान मनुष्य कोई ईश्वर या मशीन नहीं है जो हमेशा त्रुटिहीन काम करे। हम जब भी कोई नया काम सीखते हैं, नया रास्ता चुनते हैं या जीवन में आगे बढ़ते हैं, तो गलतियां होना स्वाभाविक है। सीखने का जरिया: गलतियां इस बात का प्रमाण हैं कि हम प्रयास कर रहे हैं। बिना गलती किए कोई भी व्यक्ति महानता या सफलता हासिल नहीं कर सकता। अनुभव की नींव: हर भूल हमें एक नया पाठ पढ़ाती है। जो व्यक्ति अपनी भूलों से सीखता है, वह जीवन में आगे चलकर और अधिक परिपक्व और सजग बनता है। 2. इरादों की नीयत: मन का सच्चा दर्पण गलती और इरादे के बीच एक बहुत बारीक लेकिन महत्वपूर्ण अंतर होता है। गलती इंसान की अनजाने में हुई भूल है, जबकि इरादा उसकी सोच, नीयत और योजना को दर्शाता है। सच्चाई और ईमानदारी: यदि आपका इरा...

समय, तृष्णा और जीवन का सच्चा सुख: अंतर्मन को छूने वाली एक प्रेरणादायक सीख

  समय, तृष्णा और जीवन का सच्चा सुख: अंतर्मन को छूने वाली एक प्रेरणादायक सीख जीवन एक बहती हुई नदी की तरह है, जो हर पल आगे बढ़ रही है। हम अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में इतने व्यस्त हो जाते हैं और यह भूल जाते हैं कि समय कितनी तेज़ी से हमारे हाथों से फिसल रहा है। दिए गए विचार इस कड़वे सत्य और जीवन के वास्तविक अर्थ को बहुत ही सुंदरता से उजागर करते हैं। आइए, इन पंक्तियों के गहरे भावों को समझें और अपने जीवन में उतारने का प्रयास करें । 1. समय का अनवरत प्रवाह: मुट्ठी की रेत जैसे मुट्ठी में बंद रेत धीरे-धीरे उंगलियों के बीच से सरक जाती है, ठीक वैसे ही समय भी हमारे हाथों से चुपचाप निकल जाता है। हम चाहें या न चाहें, समय किसी के लिए नहीं रुकता। भौतिक संसार की हर वस्तु और प्राणी समय के साथ क्षीण (जीर्ण-शीर्ण) होते चले जाते हैं। बुढ़ापा एक ऐसा सत्य है, जिसे कोई भी टाल नहीं सकता। जब शरीर ढलने लगता है और ताकत कम होने लगती है, तब मनुष्य को समय के महत्व का अहसास होता है। इसीलिए, जो समय आज हमारे पास है, उसका सही उपयोग करना ही बुद्धिमत्ता है। 2. इच्छा, आवश्यकता और 'तृष्णा' का अंतर इस संदेश में ...

धन से नहीं, धैर्य से मिलता है सुख

  धन से नहीं धैर्य से मिलता है सुख   इस सुंदर विचार में जीवन का एक बहुत गहरा और शाश्वत दर्शन छिपा हुआ है। इसका विस्तार से विश्लेषण इस प्रकार है: धन से नहीं धैर्य से मिलता है सुख। 1. असंतोष ही समस्त दुखों की जड़ है मनुष्य जब अपनी उपलब्धियों, स्थिति या साधनों से संतुष्ट नहीं होता, तो उसके भीतर निरंतर अभाव (कमी) की भावना बनी रहती है। ऐसा व्यक्ति चाहे कितनी भी सफलता या संपत्ति प्राप्त कर ले, उसका ध्यान हमेशा उसी चीज़ पर टिका रहता है जो उसके पास नहीं है। यही असंतोष मन की शांति को छीन लेता है। 2. सुख पाने में नहीं, स्वीकार करने में है साधारणतः लोग सोचते हैं कि इच्छाओं की पूर्ति हो जाना ही सुख है। जबकि सच्चाई यह है कि एक इच्छा पूरी होते ही दूसरी इच्छा जन्म ले लेती है। सच्चा सुख तब घटित होता है जब व्यक्ति के भीतर "और पाने" की अंधी दौड़ रुक जाती है और वह वर्तमान स्थिति को पूरे भाव से स्वीकार कर लेता है। 3. सोने का महल बनाम झोपड़ी (मानसिक स्थिति का अंतर) महलों का दुख: यदि मन में लालसा, तृष्णा और तुलना की भावना बनी रहे, तो व्यक्ति सोने के महल और तमाम सुख-सुविधाओं के बीच रहकर भी...

शक्ति और सहनशक्ति का अद्भुत संगम: असली ताकत का रहस्य

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  "उस व्यक्ति की शक्ति का कोई मुकाबला नहीं, जिसके पास शक्ति के साथ सहनशक्ति भी हो। राधे राधे" शक्ति और सहनशक्ति का अद्भुत संगम: असली ताकत का रहस्य हम अक्सर ताकतवर उसे मानते हैं जो सबसे तेज़ बोलता है, जो किसी के सामने झुकता नहीं, या जो अपनी शारीरिक और मानसिक क्षमता से दूसरों को झुकाने का माद्दा रखता है। लेकिन क्या सचमुच केवल अधिकार, धन, बल या ज्ञान होना ही इंसान को सर्वशक्तिमान बनाता है? अध्यात्म और जीवन के कड़वे अनुभव हमें सिखाते हैं कि एकांगी शक्ति इंसान में अहंकार को जन्म देती है, जबकि जब इसी शक्ति के साथ सहनशक्ति (धैर्य) जुड़ जाती है, तो इंसान अजेय बन जाता है। जैसा कि कहा गया है— उस व्यक्ति की शक्ति का कोई मुकाबला नहीं कर सकता, जिसके पास शक्ति के साथ-साथ सहनशक्ति भी हो। शक्ति और सहनशक्ति में अंतर शक्ति वह ऊर्जा है जो आपको कुछ करने, बदलाव लाने या अधिकार जताने की क्षमता देती है। यह एक हथियार की तरह है। लेकिन सहनशक्ति (धैर्य और संयम) वह विवेक है जो आपको सिखाता है कि इस हथियार का उपयोग कब करना है और कब इसे म्यान में ही रखना है। बिना सहनशक्ति के शक्ति: जब किसी व्यक्ति क...

"सब कुछ खोकर भी जो शांत है, समझ लो उसने ईश्वर के न्याय पर अपना सब कुछ छोड़ दिया है !! सुन्दर विचार जिसमें जीवन का गहरा रहस्य छिपा है।"

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तुलसी का माला सुखदाई जीवन के लिए जिसे धारण करने से श्री हरि विष्णु प्रसन्न रहते हैं।   "सब कुछ खोकर भी जो शांत है, समझ लो उसने ईश्वर के न्याय पर अपना सब कुछ छोड़ दिया है !!" इंसान के जीवन में सुख और दुःख, पाना और खोना एक चक्र की तरह चलता रहता है। कई बार परिस्थिति ऐसी आ बनती है जहाँ व्यक्ति अपनी मेहनत, रिश्तों, सपनों या सर्वस्व को खो देता है। ऐसी विषम परिस्थिति में सामान्यतः इंसान टूट जाता है, क्रोधित हो उठता है या हताशा के सागर में डूब जाता है। लेकिन इन्हीं तूफानों के बीच यदि कोई व्यक्ति पूरी तरह शांत और स्थिर बना रहता है, तो यह उसकी कमजोरी नहीं, बल्कि उसके भीतर छिपी अपार आध्यात्मिक शक्ति और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास का प्रमाण है। १. परम शांति का आधार: अटूट विश्वास जब कोई इंसान अपने जीवन के सबसे बड़े संकट से गुजरने के बाद भी मन से शांत रहता है, तो इसका अर्थ यह है कि उसने दुनियादारी के तर्कों से परे जाकर उस ईश्वर की सत्ता को स्वीकार कर लिया है। वह यह समझ चुका है कि संसार का हर न्याय या फैसला इंसान के हाथों में नहीं होता। जब व्यक्ति को यह बोध हो जाता है कि न्याय करने वाला ...

सोच और पानी हमेशा साफ रखिए, तबीयत और जिंदगी संवर जाएगी। शुभ प्रभात

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सोच और पानी हमेशा साफ रखिए: सेहत और जिंदगी संवारने वाले अनमोल विचार कल्पना कीजिए कि सुबह-सुबह सूरज की सुनहरी किरणें आपके चेहरे पर पड़ रही हों और आपके सामने एक गिलास एकदम साफ और स्वच्छ पानी रखा हो। हम सभी जानते हैं कि जल ही जीवन है। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि पानी की तरह ही हमारी सोच भी हमारे जीवन को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है? ​तस्वीर में एक बहुत ही गहरी और खूबसूरत बात कही गई है: "सोच और पानी हमेशा साफ होना चाहिए, खराब पानी तबियत बिगाड़ देता है और खराब सोच जिंदगी बिगाड़ देती है।" ​आइए आज इस ब्लॉग पोस्ट में समझते हैं कि कैसे हमारी सोच और पानी का स्वच्छता से सीधा रिश्ता हमारे जीवन, सेहत और खुशहाली से जुड़ा हुआ है। ​1. पानी की स्वच्छता और शारीरिक स्वास्थ्य ​जब हम गंदा या दूषित पानी पीते हैं, तो इसका सीधा असर हमारे शरीर पर पड़ता है। दूषित पानी से पेट की बीमारियां, इंफेक्शन और कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। स्वच्छ पानी पीना हमारे शरीर को डिटॉक्स करता है, ऊर्जा देता है और हमें दिनभर तरोताजा बनाए रखता है। ​ठीक इसी प्रकार, यदि हम अपने दैनिक जीवन में खान-पान...

शुभ प्रभात - सुविचार ​"परछाइयों के पीछे भागने के बजाय, सूर्य की किरणों का पीछा कीजिए। अपने दिल में साहस, आत्मा में निर्भीकता और मन में आज श्रेष्ठता पाने का अडिग लक्ष्य रखिए।"

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  शुभ प्रभात - सुविचार ​ "परछाइयों के पीछे भागने के बजाय, सूर्य की किरणों का पीछा कीजिए। अपने दिल में साहस, आत्मा में निर्भीकता और मन में आज श्रेष्ठता पाने का अडिग लक्ष्य रखिए।" ​Good Morning Suvichar in Hindi ​Hindi Suvichar ​Good Morning Hindi Quotes ​Prabhat Vichar ​Aaj Ka Suvichar    विचार (विस्तृत भावार्थ): ​जीवन में हम अक्सर अतीत की पुरानी यादों, असफलताओं और अंधेरी परछाइयों में खोए रहते हैं। लेकिन सच्चा जीवन वही है जो हर सुबह उगते सूर्य की तरह नया सवेरा लेकर आए। ​ प्रकाश की ओर बढ़ें: निराशा और संशय की परछाइयों को पीछे छोड़िए और सकारात्मकता रूपी सूर्य की ओर कदम बढ़ाइए। ​ साहस और धैर्य रखें: अपने दिल को इतना साहसी बनाइए कि कोई भी चुनौती आपको डिगा न सके। ​ लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करें: आज का दिन आपको कुछ बड़ा और नया करने का अवसर देता है। अपनी ऊर्जा को सही दिशा में लगाएं और अपने विचारों को श्रेष्ठता की ओर ले जाएं। ​आपका आज का दिन मंगलमय और प्रेरणादायक हो! इसे भी पढ़ें  सोच और पानी हमेशा साफ रखिए तबीयत और जिंदगी संवर जाएगी

जीवन का शाश्वत सत्य: जीवात्मा से परमात्मा की यात्रा

क्रोध पर नियंत्रण कैसे करें।   जीवन का शाश्वत सत्य जानें ​ विचार ​एक बार एक शिष्य ने जिज्ञासा व्यक्त की, मानव जीवन की सबसे बड़ी खोज क्या है? यदि इस प्रश्न का सरल उत्तर खोजें, तो वह है- दुखों से पूर्ण मुक्ति और स्थायी शांति की प्राप्ति। इसी अवस्था को 'परमार्थ' कहा जाता है। अर्थात् वह स्थिति, जहां जीवन के सभी क्लेश समाप्त हो जाएं। इस अवस्था तक पहुंचने की जो प्रक्रिया है, वही साधना कहलाती है। ​हम सामान्यतः अपने आपको एक सीमित अस्तित्व के रूप में देखते हैं- एक ऐसा 'मैं' जो इच्छाओं, भावनाओं और परिस्थितियों से घिरा हुआ है। यही 'मैं' जब तक संसार के सुख-दुख में उलझा रहता है, तब तक उसे अपनी असली पहचान का बोध नहीं हो पाता। इस सीमित चेतना को ही जीवात्मा कहा गया है। इसके विपरीत, जब यही चेतना सभी बंधनों से मुक्त हो जाती है, तब उसे परमात्मा का स्वरूप माना जाता है। ​अक्सर लोग सोचते हैं कि आत्मा और परमात्मा दो अलग-अलग सत्ता हैं, जिन्हें साधना के माध्यम से मिलाया जाता है, लेकिन गहराई से देखें, तो यह अंतर वास्तविक नहीं, केवल अनुभव का अंतर है। जीवात्मा और परमात्मा के बीच जो ...

परिवर्तन पर सुविचार

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  परिवर्तन पर सुविचार: जीवन में बदलाव का महत्व और उसकी शक्ति ​"परिवर्तन प्रकृति का नियम है।" यह पंक्ति हम सभी ने कई बार सुनी और पढ़ी होगी। जीवन में हर एक पल कुछ न कुछ बदल रहा होता है। चाहे वह समय हो, मौसम हो, हमारी उम्र हो या हमारी सोच, कुछ भी एक जगह ठहरा हुआ नहीं रहता। लेकिन जब बात हमारे व्यक्तिगत जीवन, आदतों या परिस्थितियों को बदलने की आती है, तो एक गहरा सच सामने आता है: "परिवर्तन कभी आसान नहीं होता लेकिन हमेशा संभव होता है..." ​बदलाव मुश्किल क्यों होता है? ​मनुष्य का स्वभाव स्वभावतः आरामदायक स्थिति (Comfort Zone) में रहने का होता है। जब हम किसी एक ढर्रे या आदत में ढल जाते हैं, तो हमारा मस्तिष्क उसी पुराने रास्ते पर चलना पसंद करता है। किसी भी नए बदलाव को स्वीकार करने के लिए हमें अपनी पुरानी आदतों, सोच और सुरक्षा के भाव को छोड़ना पड़ता है। ​परिवर्तन कठिन इसलिए होता है क्योंकि: ​ अज्ञात का डर: हमें भविष्य का पता नहीं होता कि बदलाव के बाद स्थिति बेहतर होगी या बदतर। इस अनिश्चितता का डर हमें रुकने पर मजबूर करता है। ​ प्रयास और मेहनत: नई आदतें बनाने और पुरा...

Parwah परवाह नहीं करते। सुप्रभात संदेश

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  परवाह: दुनिया की बातों से परे, अपनी परिस्थिति पर ध्यान दें ​जीवन के सफर में हम सब अपनी-अपनी लड़ाइयां खुद लड़ते हैं। हर इंसान का संघर्ष, उसकी परिस्थितियां और उसके अनुभव अलग होते हैं। लेकिन इस यात्रा में सबसे बड़ा रोड़ा तब आता है जब हम यह सोचने लगते हैं कि "लोग क्या कहेंगे?" ​स्वामी विवेकानंद जी का विचार हमें जीवन का एक महान सत्य सिखाता है— "परवाह मत करो कि कोई क्या कहता है, क्योंकि तुम्हारी परिस्थिति सिर्फ तुम्हें पता है, लोगों को नहीं...!" ​लोगों की राय और आपकी वास्तविकता ​जब आप किसी कठिन परिस्थिति से गुजर रहे होते हैं, तब समाज या आसपास के लोग केवल आपका नतीजा (Result) देखते हैं, आपकी प्रक्रिया (Process) नहीं। उन्हें यह नहीं पता होता कि आप किस दौर से गुजर रहे हैं, आपके पास संसाधन कितने हैं या आप कितनी मानसिक और शारीरिक थकान झेल रहे हैं। ​लोग हमेशा अपनी समझ, अपने अनुभव और कभी-कभी अपनी सुविधा के अनुसार राय देते हैं। यदि आप हर व्यक्ति की बात को दिल से लगाने लगेंगे, तो आप अपनी सही दिशा से भटक जाएंगे। ​लोग क्या कहते हैं, इसका महत्व क्यों नहीं होना चाहिए? ​ परि...

Kabhi na kho, कभी न कहो कि दिन बहुत खराब है

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कभी न कहो कि दिन अपने खराब हैं: कांटों के बीच ही खिलता है सफलता का गुलाब ​जीवन एक अनवरत यात्रा है, जहाँ धूप और छाँव का आना-जाना लगा रहता है। कई बार इंसान कठिन दौर से गुजरते हुए निराश हो जाता है और सोचता है कि उसके दिन ही खराब चल रहे हैं। लेकिन सच तो यह है कि यही मुश्किल परिस्थितियां हमें मजबूत बनाती हैं और हमारी असली परीक्षा लेती हैं। ​तस्वीर में दी गई प्रेरक पंक्तियाँ जीवन के इसी सत्य को बहुत सुंदर और प्रभावी ढंग से उजागर करती हैं: ​ "कभी ना कहो कि दिन अपने ख़राब हैं, समझ लो कि हम काँटों से घिर गए गुलाब हैं। रखो हौसला वो मंज़र भी आयेगा, प्यासे के पास चलकर समंदर भी आयेगा..! थक कर ना बैठो, ऐ मंज़िल के मुसाफ़िर; मंज़िल भी मिलेगी और जीने का मज़ा भी आयेगा...!!" ​1. कांटों से घिरे गुलाब बनें, शिकायत न करें जब भी जीवन में असफलता या परेशानियां आएं, तो समय को दोष देने के बजाय अपनी सोच बदलें। जिस प्रकार एक गुलाब का फूल कांटों की सुरक्षा में ही अपनी सुंदरता और खुशबू बिखेरता है, ठीक उसी तरह एक इंसान भी विपरीत परिस्थितियों से टकराकर ही महान बनता है। यदि कांटों का डर हो, तो ...

जीवन की सच्ची कमाई jeevan ki sachchi kamai

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  मित्रता एक अनमोल रतन है। सच्चा मित्र वही है जिसमें मित्र की भावना हो। जो मित्र के सुख दुख की परवाह करें। जैसे श्री राम और सुग्रीव की मित्रता, जैसे श्री कृष्ण और सुदामा की मित्रता। परवाह करने वाला मित्र मिल जाए तो जीवन सफल हो जाता है। पड़ोसी वही है जो पड़ोसी का दर्द समझे। रिश्तेदार वहीं सच्चा रिश्तेदार हैं जो अपने रिश्तेदारों  को इज्जत करें। और सही में अंत तक प्यार करने वाला परिवार हो तो जीवन सफल हो जाता है। वर्ना जीवन बोझ बन जाता है। परिवार जीवन का एक महत्वपूर्ण अंग है। परिवार जीवन की एक अति महत्वपूर्ण कमाई होती है। परिवार में ही बच्चे पलकर बहुत कुछ सीखते हैं। परिवार को इसीलिए प्रथम पाठशाला माना जाता है। यदि परिवार में प्रेम और विश्वास रहे तो जीवन स्वर्ग बन जाता है। कविता क्या है? कविता कैसे बनती है ?