अच्छी बातें सुन्दर जीवन के लिए
रहिमन धागा प्रेम का मत तोड़ो चटकाए।
टूटे पर फिर ना जुड़े, जुड़े गांठ परि जाय।।
अर्थात प्रेम रूपी धागा जल्दी नहीं तोडना चाहिए, क्योंकि एक बार प्रेम का धागा टूट गया तो जल्दी जुड़ता नहीं है, और यदि जुड़ भी जाय तो उसमें गांठ पड़ जाता है। दरार तो आ ही जाती है।
दोस्तों! बढ़िया काम शुरू करने के लिए आज से बढ़िया दिन दूसरा नहीं आएगा, क्योंकि जब भी बढ़िया काम शुरू कर दी जाए वही शुभ दिन बन जाता है।
काल करो से आज कर, आज करो से अब।
पल में प्रलय होएगी, बहुरि करोगे कब।।
यदि अपना संकल्प दृढ़ हो। अपना चरित्र मजबूत हो तो कुसंगति भी कुछ बिगाड़ नहीं सकता। काजल की कोठरी से भी आप बेदाग बाहर निकल आएंगे। जैसे चन्दन के वृक्ष पर बड़े बड़े विषधर कालसर्प रहते हैं, सुगंध के लिए। लेकिन इससे चंदन की शीतलता कम नहीं होती।
जो रहीम उत्तम प्रकृति का करि सकत कुसंग ।
चंदन विष व्यापत नहीं, लपटे रहत भुजंग।।
लेकिन समय यदि अच्छा नहीं चल रहा हो।
परिस्थितियां प्रतिकूल हो, तब जो साथ दे, वही सच्चा मित्र हैं।
कहि रहीम संपत्ति सगे,बनत बहुत बहु रीत।
बिपत्ति कसौटी जे कसे, ते ही सांचे मीत।।
*************************************************
खुद मझधार में होकर भी ,
जो औरों का साहिल होता है।
ईश्वर जिम्मेदारी उसी को देता है,
जो निभाने के काबिल होता है।।
*********************""************"""*""""*******🙏⚘🌻🌹👌🌹🌻⚘🙏
*"ख़ुद मझधार में होकर भी",*
*"जो औरों का साहिल होता है" ।।*
*"ईश्वर जिम्मेदारी उसी को देता हैं",*
*"जो शेखर निभाने के क़ाबिल होता है" !!*
*🙏🌹🌻शुभ सुप्रभात🌻🌹🙏*
सहारे और उम्मीदें मनुष्य को खोखला और कमजोर कर देती हैं यारों!
इसलिए खुद पे भरोसा रखो और शुरू कर दो अपना काम।।
मीराबाई के पद" कविता. Click here to view
" सब्र और सच्चाईएकऐसी सवारी है;जो अपने सवार कोकभी गिरने नहीं देता हैना किसी के कदमों मेंऔरना किसी के नज़रों में। "
यदि शांति चाहते हो
तो दूसरों को बदलने से अच्छा है
कि खुद को बदल लो,
क्योंकि कंकड़ पत्थर से बने रास्ते पर चलने
के लिए
दुनिया भर में कारपेट बिछाने
से अच्छा है कि
अपने पैरों में जूते पहन लें।
जिंदगी भी झूले की तरह है
कभी आगे
कभी पीछे, कभी सुख कभी
दुःख
लेकिन घबराइए नहीं
झूला जितना पीछे जाता है, उतना आगे भी
जाता है
इसी तरह, जीवन में
जितना दुख है, उतना सुख भी अवश्य
आएगा।
"कोई निरपराध को मारे,
तो क्यों अन्य न उसे उबारे ?
रक्षक पर भक्षक को वारे,
न्याय दया का दानी।"
हमेशा बचाने वाले की जीत होती है। रक्षक भक्षक से श्रेष्ठ है।
दुःख भोगने वाला मनुष्य तो आगे सुखी भी हो सकता है, परन्तु दुख देने वाला कभी सुखी नहीं हो सकता।
हर तरह के वक्त आते हैं
जिंदगी में।
वक़्त के गुजरने में
वक़्त नहीं लगता।
यदि शांति चाहते हो
तो दूसरों को बदलने से अच्छा है
कि खुद को बदल लो,
क्योंकि कंकड़ पत्थर से बने रास्ते पर चलने
के लिए
दुनिया भर में कारपेट बिछाने
से अच्छा है कि
अपने पैरों में जूते पहन लें।
कभी आगे
कभी पीछे, कभी सुख कभी
दुःख
लेकिन घबराइए नहीं
झूला जितना पीछे जाता है, उतना आगे भी
जाता है
इसी तरह, जीवन में
जितना दुख है, उतना सुख भी अवश्य
आएगा।
जिनका दिल चेहरे से ज्यादा सुंदर हो।





https://avbeducationblogging.blogspot.com/2021/06/blog-post_14.html
जवाब देंहटाएं